उरी से नहीं लौटे जिनके पापा

उरी हमले में शहीद हुए जवानों के परिवार वालों पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। खास तौर पर वे शहीद जवान जिनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। इनमें से कुछ बच्चे इतने छोटे हैं कि यह भी नहीं समझ पा रहे कि घर पर बाकी सब रो क्यों रहे:

सब रो क्यों रहे, इतनी भीड़ क्यों है.....

उरी में शहीद हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर के राजेश सिंह के छह साल के मासूम बेटे रिशांत के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि अाखिर घर पर बाकी सब रो क्यों रहे। इतने लोगों की भीड़ क्यों हैं। रिशांत की अपने पापा से फोन पर नियमित इसलिए बात नहीं हो पाती थी क्योंकि उनकी तैनाती की जगह मोबाइल का नेटवर्क कम मिलता था।

बेटियां बोलीं, करेंगे देश की सेवा

उरी में शहीद हुए राजस्थान के राजसमंद के निम्ब सिंह रावत की चार बेटियों ने हौसला बनाए रखा है। उनका कहना है कि वे सेना और पुलिस में भर्ती होकर आंतकियों से लोहा लेंगी, पापा की तरह देश की सेवा करेंगी। वे अपने पिता की शहादत खाली नहीं जाने देगी।

दशहरे पर अाने वाले थे पापा...

बिहार के गया जिले के नायक सुनील कुमार विद्यार्थी दशहरे पर घर आने वाले थे। उससे पहले उरी में उनकी शहादत की खबर अा गयी। उनकी बड़ी बेटी ने कहा, पापा दशहरे पर घर अाने का वादा नहीं निभा सके पर वे देश के लिए कुर्बान हो गए। मुझे अपने पापा पर गर्व है।

पापा का सपना पूरा करने की ललक

शहीद सुनील कुमार विद्यार्थी की तीनों बेटियां आरती, अंशु और अंशिका पापा की मौत की खबर सुनने के बाद भी अपने स्कूल में परीक्षा देने गईं। ताकि पापा के सपनें पूरे हो सकें। पापा ने दशहरे पर अाने का वादा करने के साथ ही यह भी कहा था कि 'अच्छे से परीक्षा देना, अच्छे मार्क्स लाना।'

पापा की तरह मैं भी पहनूंगा वर्दी

जम्मू और कश्मीर के सांबा जिले के हवलदार रवि पाल सलोत्रा के 10 साल के बेटे को यह मालूम है कि उसके पिता उरी आतंकी हमले में शहीद हो गए हैं लेकिन देश सेवा का उसका जज्बा इससे और मजबूत हुआ है। 10 वर्षीय वंश फौज की वर्दी पहनना चाहते हैं और पिता की मौत का बदला लेना चाहते हैं। 

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