महंगा मोबाइल फोन डाटा, DTH टीवी अौर गुस्से में पब्लिक !

न फोटो डाउनलोड हो रहा है अौर न विडियो। फोन हाथ में थामे पब्लिक बफरिंग देख रही है अौर कोस रही है मोबाइल डाटा की घटिया स्पीड को। भारत में यह नजारा अाम है। लोगों का परेशान होना जायज भी है। अब तो मामला 4G तक पहुंच गया लेकिन डाउनलोड के वक्त चरखी थमने का नाम नहीं ले रही। 

4G में 3G वाली स्पीड अौर 3G में 2G वाली स्पीड मिलना भी मुश्किल है । इससे बेपरवाह कंपनियां मोबाइल फोन डाटा का दाम दे दना दन बढ़ाने से परहेज नहीं करतीं। डाटा जरूर कम होता जा रहा है। 50 या 60 रुपए का 2GB अब 150 रुपए से भी ऊपर का हो गया है लेकिन डाटा 2GB से घट कर 1 । लगभग हर मोबाइल कंपनी का यही हाल है। विज्ञापनों में जरूर यह दिखा दिया जाता है कि नेटवर्क हिमालय से लेकर रेगिस्तान तक टनाटन चल रहा है। 

ऐसे में यह हैरानी की बात नहीं कि जब कोई महंगे मोबाइल डाटा का मुद्दा छेड़े तो लोगों का गुस्सा फूट पड़े। पारस मान ने जब मोबाइल डाटा का दाम घटाने की मांग करते हुए Change.org पर अॉनलाइन मुहिम शुरू की तो न केवल तकरीबन 1300 लोगों ने हस्ताक्षर कर साथ दिया बल्कि खुल कर अपनी राय भी दी । बानगी देखिए:

विजय गोयल ने हस्ताक्षर करने के साथ लिखाक्योंकि यह बहुत बेजा मुनाफाखोरी है। और INTERNET USERS के साथ बेईमानी है। यह बन्द होनी ही चाहिए।

शैलेन्द प्रभात सिन्हा ने लिखा: चूँकि 2 वर्ष के अंदर इन लोगो ने इंटरनेट की रेट 5 गुणी कर दी है।जहां एक तरफ प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया का नारा दे रहे है और कई राज्य वाई फाई फ्री देने का वादा कर रहे है।

गौरव सिंह ने टिप्पणी की: day by day internet cost increasing and companies taking advantage of compulsion.

राजीव कुमार जैन ने राय दी: प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के स्वप्न को साकार करने एवं आम लोगों को मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिये आवश्यक है कि इन्टरनेट को सर्व सुलभ बनाया जाये क्योंकि यह आम लोगों पर ही आधारित है। इसके लिये सस्ती और वेहतर इन्टनेट सेवा सबसे आवश्यक है। 

कुछ ऐसा ही DTH टीवी के मामले में भी है क्योंकि कंपनियां यहां भी मनमाने तरीके से दाम बढ़ा देतीं हैं। इतना ही नहीं लोगों का प्लान भी अपनी ही मर्जी से बदल भी देतीं हैं। यह सब उपभोक्ता को बाद में ही पता चल पाता है। 

लोकेन्द्र ने कंपनियों की मनमानी के खिलाफ अॉनलाइन मुहिम शुरू करते हुए लिखा है: ‘मोबाइल फोन की तरह portability की सुविधा न होने से हम उपभोक्ता अच्छी सेवा न दे रही DTH कंपनी को छोड़ दूसरी company में ट्रांसफऱ नहीं कर सकते। इसलिए इनकी मनमानी जारी है। dth operator portability के कानून से इस पर काफी हद तक रोक लगेगी।’ 

इस मुहिम को भी सैंकड़ों लोगों का समर्थन मिला है अौर लोगों ने DTH कंपनियों की मनमानी के खिलाफ मुखर होकर अपनी बात कही है: 

शिवानी जोशी की टिप्पणी है: 'देश के सभी लोगों को मिलकर इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना चाहिए'

अश्वनी शर्मा ने लिखा: 'मैं भी लोकेन्द्र जी की बात से सहमत हु की हर कुछ महीने में dth service महगी होती जा रही हे। लोगो की salary तो बढ़ती नहीं पर खर्चे बढ़ते जा रहे हे। private jobs की कोई सिक्यूरिटी नहीं हे। उसमे ये छोटे छोटे खर्चे कम न होने के बजाये बढ़ते जा रहे हे। हर दिन कुछ कुछ करके dth महगा होता जा रहा हे। कृपया कुछ कीजिये।'

रवि अरोड़ा की राय है: 'मैं सहमत हूँ , पहले केबल ऑपरेटर का लाभ अधिक होता था एक छोटा हिस्सा चैनल्स के हिस्से आता था ,आज सेटटॉप बॉक्स लगने के बाद चैनल्स और dth कंपनी का लाभ बहोत बढ़ चूका है फिर ये बार बार मासिक किराया बढ़ाना उचित नहीं है और इनकी आपस में कोई प्रतिस्पर्धा भी नहीं है'

  • पारस अौर लोकेन्द्र की शुरू की हुई मुहिम से अाप भी सहमत हैं तो नीचे के लाल बटन पर क्लिक कर Change.org के पेज पर जाएं अौर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अपनी टिप्पणी भी जरूर दर्ज करें।